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मोदीनगर: वीर गोकुला सिंह के बलिदान दिवस पर यज्ञ हवन व श्रदांजलि सभा का आयोजन

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रिपोर्ट: जितेंद्र कुमार (ब्यूरो ग़ाज़ियाबाद)

वीर गोकुला सिंह को इतिहास मे उचित स्थान देने के लिए सरकार पुनः इतिहास लेखन कराये – बाबा परमेन्द्र आर्य

आज गांव रोरी मे समरवीर गोकुला सिंह जाट के 353वे बलिदान दिवस पर यज्ञ हवन किया गया और गोकुला जी के चित्र पर माला व पुष्प अर्पित किये।

सर्वजातीय श्योराण खाप उत्तर प्रदेश के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने अपने सम्बोधन मे कहा समर वीर गोकुल जी का बलिदान दिवस मनाने का उद्देश्य यहां है कि आने वाली पीढी उनके त्याग, तप, पराक्रम व बलिदान से प्रेरणा लेकर देश व समाज में हो रहे अत्याचार से लडना सीखें। जो सत्य व धर्म के लिए लडता हुआ समर भूमि में अपना बलिदान देता है वो ही अमरत्व को प्राप्त होता है। उन्होंने औरंगजेब जैसे अत्याचारी शासक के विरुद्ध बगावत कर पूरे उत्तर भारत में सशस्त्र किसान क्रान्ति का बिगुल बजा दिया था और किसानों की एक सेना बना ली जिससे लड़ने के लिए मुगल सैनिक डरने लगे थे । गोकुला जाट की वीरता और साहस को देखकर औरंगजेब को स्वयम लड़ने के लिए दिल्ली छोड़कर मथुरा आना पड़ा। औरंगजेब की तोपों, हाथियों व घुड़सवारों की विशाल सेना से गोकुला चार दिन तक युद्ध लडता रहा अन्त में उन्हें परिवार व हजारों किसानों सहित बंदी बना लिया गया। 01जनवरी1670 को आगरा के लालकिले में इस्लाम कबूल न करने पर साथियों सहित जल्लादों से टुकड़े टुकड़े करके मरवा दिया गया था। औरंगजेब की इस बर्बरता से पूरे ब्रज प्रदेश में मुगलिया सल्तनत के खिलाफ नफरत की आग फैल गई और मुगलिया सल्तनत के समाप्त होने तक गोकुला जाट के वंशज व किसान लडते रहे।
चौधरी कविता गहलोत ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोकुल जाट एक किसान परिवार से थे उनके पास न कोई रियासत थी न कोई राज्य था। उन्होंने किसानों की सेना तैयार की जिसमें 20000 हजार सैनिक थे। इसी सेना के दम पर उन्होंने औरंगजेब के आतंक को खत्म करने का संकल्प लिया। औरंगजेब ने बड़ी सेना व भारी तोपों से तिलपत की गढी पर हमला किया गढी को नष्ट होता देख जाट क्षत्राणियो ने पुरूषों के साथ मोर्चा संभाला और अंतिम समय तक गोकुला जाट के नेतृत्व में लडती रही तिलपत की लड़ाई में कुछ महिलाएं लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं और कुछ महिलाओं ने अपना सतीत्व बचाने के लिए जौहर भी किया।
डा. पूनम चौधरी ने कहा कितने दुख की बात है कि आज हिन्दू समाज हिन्दू वीर गोकुला को बिल्कुल भूल चुका हैं। पूरे देश मे एक या दो जगह ही उनकी मूर्ति लगी होगी। उनके नाम पर सरकार ने कोई योजना भी नही चलाई है उनके नाम पर किसी सड़क का नाम भी नही रखा गया और भारतीय इतिहास मे भी उन्हें नही पढाया जाता है। जबकि उनके नाम पर विश्वविद्यालय व बडे बडे कालेज बनने चाहिए थे।श्रद्धांजलि सभा के उपरांत समाजसेवियों को शाँल ओढाकर व सम्मानप्रतीक भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सरोज देवी , चौधरी गंगाराम, अमरजीत , रामनरायण आर्य, मनोज चौधरी , सुभाष चैयरमैन , ज्ञानेन्द्र , सतेन्द्र ,मुकेश आदि उपस्थित रहे।

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